पहले भी जीते थे मगर जबसे मिली है ज़िंदगी
सीधी नहीं है दूर तक उलझी हुई है ज़िंदगी
अच्छी भली थी दूर से जब पास आई खो गई
जिसमें न आये कुछ नज़र वो रोशनी है ज़िंदगी
हर रास्ता अन्जान सा हर फलसफ़ा नादान सा
सदियों पुरानी है मगर हर दिन नई है ज़िंदगी
मिट्टी हवा बन कर उड़ी घूमी फिरी वापस मुड़ी
क़बरों पे क़तबों की तरह लिक्खी हुई है ज़िंदगी
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Friday, October 3, 2008
कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे
समझे न जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे
फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोख़ तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे
इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे ग़ैरों का और अपनी कहानी कह देंगे
मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफ़ान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे
समझे न जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे
फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोख़ तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे
इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे ग़ैरों का और अपनी कहानी कह देंगे
मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफ़ान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे
कहीं तारे कहीं शबनम कहीं जुगनू निकले
सारे मंज़र तेरी आवाज़ के जादू निकले
ज़िंदगी हम जिये औरों की ख़ुशी की ख़ातिर
भीड़ में हँस दिये तन्हाई में आँसू निकले
तेरे होंठों पे चमक उट्ठे मेरा नाम कभी
और मेरी ग़ज़लों के परदों से कभी तू निकले
जब भी याद आ गया वो साँवला चेहरा ''''''''राशिद''''''''
आँखों में फूल खिले साँसों से ख़ुश्बू निकले
सारे मंज़र तेरी आवाज़ के जादू निकले
ज़िंदगी हम जिये औरों की ख़ुशी की ख़ातिर
भीड़ में हँस दिये तन्हाई में आँसू निकले
तेरे होंठों पे चमक उट्ठे मेरा नाम कभी
और मेरी ग़ज़लों के परदों से कभी तू निकले
जब भी याद आ गया वो साँवला चेहरा ''''''''राशिद''''''''
आँखों में फूल खिले साँसों से ख़ुश्बू निकले
Aabshaar-E-Ghazal
दर्द दिल में उठा सोचते सोचते
या क्या आ गया सोचते सोचते
कौन था क्या था वो याद आता नहीं
याद आ जायेगा सोचते सोचते
राह में रह गई आने वाली सहर
बुझ गया हर दिया सोचते सोचते
अजनबी लोग हैं अजनबी रास्ते
मैं कहाँ आ गया सोचते सोचते
दूर हो कर न हम-तुम क़रीब आ सके
बढ़ गया फ़ासला सोचते सोचते
या क्या आ गया सोचते सोचते
कौन था क्या था वो याद आता नहीं
याद आ जायेगा सोचते सोचते
राह में रह गई आने वाली सहर
बुझ गया हर दिया सोचते सोचते
अजनबी लोग हैं अजनबी रास्ते
मैं कहाँ आ गया सोचते सोचते
दूर हो कर न हम-तुम क़रीब आ सके
बढ़ गया फ़ासला सोचते सोचते
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