मोती हो तो बाँध के रख लूँ प्यार छुपाऊँ कैसे
वो चेहरा है हर चेहरे में उसे भुलाऊँ कैसे
चाँद नहीं फूल नहीं कोई नहीं उन सा हसीं
कौन हैं वो क्या नाम है उनका यहाँ बताऊँ कैसे
हो खोया हुआ है हर समाँ यार बिना सूना है जहाँ
नील गगन के चाँद को बाँहों में ले आऊँ कैसे
ओ हो चाहे जिन्हें मेरी नज़र हाय नहीं उनको ख़बर
बंद है मन्दिर का दरवाज़ा फूल चढ़ाऊँ कैसे
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Friday, October 3, 2008
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