आँख खुलते ही तुम छुप गये हो कहाँ
तुम अभी थे यहाँ, तुम अभी थे यहाँ
अभी साँसों की खुश्बू हवाओन में है
अभी कदमों की आहट फ़िज़ाओं में है
अभी शाखों पे है उंगलियों के निशाँ
तुम अभी थे यहाँ, तुम अभी थे यहाँ
आँख खुलते ही तुम ...
तुम जुदा होके भी मेरी राहों में हो
गर्म अश्कों में हो, सर्द आहों में हो
चाँदनी में झलकती हैं पर्छाइयाँ
तुम अभी थे यहाँ, तुम अभी थे यहाँ
आँख खुलते ही तुम ...
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Tuesday, November 4, 2008
Wednesday, October 8, 2008
Saturday, October 4, 2008
दिल ग़म से जल रहा है जले, पर धुआँ न हो
मुमकिन है इसके बाद कोई, इम्तेहां न हो
दुनिया तो क्या ख़ुदा से भी घबराके कह दिया
वह महर्बां नहीं तो कोई महर्बां न हो
लूटा ख़ुशी ने आग लगा दी बहार ने
बरबाद इस तरह भी किसी का जहाँ न हो
अब तो वहीं सुकूं मिलेगा मुझे जहाँ
ये संगदिल ज़मीं न हो, आस्मां न हो
दिल ग़म से जल रहा है जले, पर धुआँ न हो
मुमकिन है इसके बाद कोई, इम्तेहां न हो
दुनिया तो क्या ख़ुदा से भी घबराके कह दिया
वह महर्बां नहीं तो कोई महर्बां न हो
लूटा ख़ुशी ने आग लगा दी बहार ने
बरबाद इस तरह भी किसी का जहाँ न हो
अब तो वहीं सुकूं मिलेगा मुझे जहाँ
ये संगदिल ज़मीं न हो, आस्मां न हो
दिल ग़म से जल रहा है जले, पर धुआँ न हो
सुरमैइ रात है सितारे हैं
आज दोनों जहाँ हमारे हैं
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
फिर यह रुत यह समा मिले न मिले
आर्ज़ू का चमन खिले न खिले
वक़्त का ऐतबार कौन करे
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
ले भी लो हम को अपनी बाहों में
रूह बेचैन है निगाहों में
इल्तेजा बार बार कौन करे
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
नई रात ढलती जाती है
रूह ग़म से पिघलती जाती है
तेरी ज़ुल्फ़ों से प्यार कौन करे
अब तेरा इंतज़ार कौन करे
तुम को अपना बना के देख लिया
एक बार आज़मा के देख लिया
बार बार ऐतबार कौन करे
अब तेरा इंतज़ार कौन करे
ऐ दिल-ए-ज़ार सोग़वार न हो
उनकी चाहत में बेक़रार न हो
हाय, बदनसीबों से प्यार कौन करे
अब तेरा इंतज़ार कौन करे
आज दोनों जहाँ हमारे हैं
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
फिर यह रुत यह समा मिले न मिले
आर्ज़ू का चमन खिले न खिले
वक़्त का ऐतबार कौन करे
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
ले भी लो हम को अपनी बाहों में
रूह बेचैन है निगाहों में
इल्तेजा बार बार कौन करे
सुबह का इंतेज़ार कौन करे
नई रात ढलती जाती है
रूह ग़म से पिघलती जाती है
तेरी ज़ुल्फ़ों से प्यार कौन करे
अब तेरा इंतज़ार कौन करे
तुम को अपना बना के देख लिया
एक बार आज़मा के देख लिया
बार बार ऐतबार कौन करे
अब तेरा इंतज़ार कौन करे
ऐ दिल-ए-ज़ार सोग़वार न हो
उनकी चाहत में बेक़रार न हो
हाय, बदनसीबों से प्यार कौन करे
अब तेरा इंतज़ार कौन करे
Friday, October 3, 2008
हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी
हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
ज: हर नयी दिन नया इंतज़ार आदमी
ज: ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र डर सफ़र
ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र डर सफ़र
आखिरी साँस तक बेक़रार आदमी
हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी
हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
ज: हर नयी दिन नया इंतज़ार आदमी
ज: ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र डर सफ़र
ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र डर सफ़र
आखिरी साँस तक बेक़रार आदमी
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