खामोशी ख़ुद अपनी सदा हो ऐसा भी हो सकता है
सन्नाटा ही गूंज रहा हो ऐसा भी हो सकता है
मेरा माझी मुझ से बिछड़ कर क्या जाने किस हाल में है
मेरी तरह वो भी तनहा हो ऐसा भी हो सकता है
सहारा सहारा कब तक मैं ढूंडूं उल्फत का एक आलम
आलम आलम इक सहारा हो ऐसा भी हो सकता है
अहल-ऐ-तूफ़ान सोच रहे हैं साहिल डूबा जाता है
ख़ुद उन का दिल दूब रहा हो ऐसा भी हो सकता है
Showing posts with label Zaka Siddiqui. Show all posts
Showing posts with label Zaka Siddiqui. Show all posts
Monday, October 13, 2008
जीते रहने की सज़ा दे जिंदगी ऐ जिंदगी
अब तो मरने की दुआ दे जिंदगी ऐ जिंदगी
मैं तो अब उकता गया हूँ क्या यही है कायनात
बस ये आईना हटा दे जिंदगी ऐ जिंदगी
ढूडने े निकला था तुझ को और ख़ुद को खो दिया
तू ही अब मेरा पता दे जिंदगी ऐ जिंदगी
या मुझे एहसास की इस क़ैद से कर दे रिहा
वरना दीवाना बना दे जिंदगी ऐ जिंदगी
अब तो मरने की दुआ दे जिंदगी ऐ जिंदगी
मैं तो अब उकता गया हूँ क्या यही है कायनात
बस ये आईना हटा दे जिंदगी ऐ जिंदगी
ढूडने े निकला था तुझ को और ख़ुद को खो दिया
तू ही अब मेरा पता दे जिंदगी ऐ जिंदगी
या मुझे एहसास की इस क़ैद से कर दे रिहा
वरना दीवाना बना दे जिंदगी ऐ जिंदगी
Subscribe to:
Comments (Atom)
