किस्मत की, बाज़ी का, फ़ैसला तो, हो गया है
फ़ासला भी, खो गया है, देखें किसको कौन मिलता है
जिसको जिसे मिलना है, हर हाल में मिलता है
दुनिया में मुहब्बत ही, किस्मत को बदलती है
ये शम्मा हवाओं में, बुझती नहीं जलती है
कुदरत ही बनाती है हर रिश्ता मुहब्बत का
यूँ भी कभी होता है, अनजान सी राहों में
हर रोज़ नहीं बनती तसवीर मुहब्बत की
जो साँसों में रहता है, जो पलकों में सोता है
वो प्यार जवानी में, इक बार ही होता है
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Saturday, October 4, 2008
Friday, October 3, 2008
मुद्दतें बीत गईं तुम नहीं आये अब तक
रास्ता और दिखाओगे न जाने कब तक
जो भी मिलता है वो तुमसा ही नज़र आता है
दिल की तन्हाइयाँ बहलाती हैं यूँ भी ग़म को
जैसे सच मुच ही पुकारा हो तुम्हीं ने हमको
पास आते ही मगर ख़ाब बिखर जाता है
वो हसीं लम्हे जो कल तक थे मुरादों की तरह
आज पलकों पे चमक उठते हैं यादों की तरह
दर्द रह जाता है और वक़्त गुज़र जाता है
भेजते हो कभी गुल को तो कभी शबनम को
तुम कहाँ कैसे हो मालूम है हर मौसम को
चाँद हर शब को तुम्हारी ही ख़बर लाता है
रास्ता और दिखाओगे न जाने कब तक
जो भी मिलता है वो तुमसा ही नज़र आता है
दिल की तन्हाइयाँ बहलाती हैं यूँ भी ग़म को
जैसे सच मुच ही पुकारा हो तुम्हीं ने हमको
पास आते ही मगर ख़ाब बिखर जाता है
वो हसीं लम्हे जो कल तक थे मुरादों की तरह
आज पलकों पे चमक उठते हैं यादों की तरह
दर्द रह जाता है और वक़्त गुज़र जाता है
भेजते हो कभी गुल को तो कभी शबनम को
तुम कहाँ कैसे हो मालूम है हर मौसम को
चाँद हर शब को तुम्हारी ही ख़बर लाता है
मेरी निगाह छलकता हुआ है पैमाना
निगाह-ए-मय से पिलाऊँ बनाऊँ दीवाना
जो पीने आये हैं उनसे कहो मुझे देखें
मेरा ये शोख़ सरापा है एक मयख़ाना
हर एक नज़र में मेरे शबाब की मस्ती
जिसे भी देख ले मेरी अदा का मस्ताना
ये सारी गर्मी-ए-महफ़िल है मेरे ही दम से
जिसे हो जलना क़रीब आये बन के परवाना
जिधर भी जाऊँ उधर फैलती हैं ख़ुश्बूएं
जो मेरी पाये महक होश से हो बेगाना
निगाह-ए-मय से पिलाऊँ बनाऊँ दीवाना
जो पीने आये हैं उनसे कहो मुझे देखें
मेरा ये शोख़ सरापा है एक मयख़ाना
हर एक नज़र में मेरे शबाब की मस्ती
जिसे भी देख ले मेरी अदा का मस्ताना
ये सारी गर्मी-ए-महफ़िल है मेरे ही दम से
जिसे हो जलना क़रीब आये बन के परवाना
जिधर भी जाऊँ उधर फैलती हैं ख़ुश्बूएं
जो मेरी पाये महक होश से हो बेगाना
लोग मुझे पागल कहते हैं गलियों में बाज़ारों में
मैंने प्यार किया है मुझको चुनवा दो दीवारों में
हर पनघट पर मेरे फ़साने चौपालों में ज़िक्र मेरा
मेरी ही बातें होती हैं बस्ती में चौबारों में
दुनिया वालो कुछ तो मुझको मेरी वफ़ा की दाद मिले
मैंने दिल के फूल के खिलाये शोलों में अंगारों में
गीत है या आहों का धुवाँ है नग़मा है या दिल की तड़प
इतना दर्द कहाँ से आया साज़ों की झंकारों में
मैंने प्यार किया है मुझको चुनवा दो दीवारों में
हर पनघट पर मेरे फ़साने चौपालों में ज़िक्र मेरा
मेरी ही बातें होती हैं बस्ती में चौबारों में
दुनिया वालो कुछ तो मुझको मेरी वफ़ा की दाद मिले
मैंने दिल के फूल के खिलाये शोलों में अंगारों में
गीत है या आहों का धुवाँ है नग़मा है या दिल की तड़प
इतना दर्द कहाँ से आया साज़ों की झंकारों में
दिल का लगाना खेल न जानो दिल का लगाना मुश्किल है
जिस पर दिल आ जाये उसको दिल से भुलाना मुश्किल है
दिल दीवाना जाने किसका रस्ता तकता रहता है
वो तो शायद था उसका लौट के आना मुश्किल है
पास था जब वो तन्हाई भी अक्सर अच्छी लगती थी
बिछड़ गये तो यूँ लगता है उसको भुलाना मुश्किल है
ग़ज़लों से गीतों से सबको बहलाना तो आसाँ है
हँस हँस कर लेकिन महफ़िल में दर्द को गाना मुश्किल है
जिस पर दिल आ जाये उसको दिल से भुलाना मुश्किल है
दिल दीवाना जाने किसका रस्ता तकता रहता है
वो तो शायद था उसका लौट के आना मुश्किल है
पास था जब वो तन्हाई भी अक्सर अच्छी लगती थी
बिछड़ गये तो यूँ लगता है उसको भुलाना मुश्किल है
ग़ज़लों से गीतों से सबको बहलाना तो आसाँ है
हँस हँस कर लेकिन महफ़िल में दर्द को गाना मुश्किल है
आँखों को इंतज़ार का दे के हुनर चला गया
चाहा था एक शख्स को जाने किधर चला गया
दिन की वो महफ़िलें गईं रातों के रतजगे गये
कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया
झोंका है एक बहार का रंग-ए-ख़याल-ए-यार भी
हर-सू बिखर बिखर गई ख़ुश्बू जिधर चला गया
उसके ही दम से दिल में आज धूप भी चाँदनी भी है
दे के वो अपनी याद के शम्स-ओ-क़मर चला गया
कू-ब-कूचा दर-ब-दर कबसे भटक रहा है दिल
हमको भुला के राह वो अपनी डगर चला गया
चाहा था एक शख्स को जाने किधर चला गया
दिन की वो महफ़िलें गईं रातों के रतजगे गये
कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया
झोंका है एक बहार का रंग-ए-ख़याल-ए-यार भी
हर-सू बिखर बिखर गई ख़ुश्बू जिधर चला गया
उसके ही दम से दिल में आज धूप भी चाँदनी भी है
दे के वो अपनी याद के शम्स-ओ-क़मर चला गया
कू-ब-कूचा दर-ब-दर कबसे भटक रहा है दिल
हमको भुला के राह वो अपनी डगर चला गया
आँचल में फूल चाँद सितारे सजा लिये
नैनों में मैंने आस के दीपक जला लिये
सुनते ही उनका नाम मेरा दिल धड़क उठा
कजरा लहक उठा मेरा गजरा महक उठा
दुनिया ने दिल के भेद निगाहों से पा लिये
करते हैं सब ही प्यार मगर इस कदर नहीं
हम उनके कब हुये ये हमें ख़ुद ख़बर नहीं
आँखों ने नींद छोड़ के सपने सजा लिये
जल्दी से इंतज़ार का मौसम तमाम हो
जी चाहता है आज ये जल्दी से शाम हो
इस बेक़रार दिल को कहाँ तक सम्भालिये
आँगन में मेरे प्यार की बारात आयेगी
था जिसका इंतज़ार वही रात आयेगी
ख़ाबों में ताजमहल वफ़ा के बना लिये
नैनों में मैंने आस के दीपक जला लिये
सुनते ही उनका नाम मेरा दिल धड़क उठा
कजरा लहक उठा मेरा गजरा महक उठा
दुनिया ने दिल के भेद निगाहों से पा लिये
करते हैं सब ही प्यार मगर इस कदर नहीं
हम उनके कब हुये ये हमें ख़ुद ख़बर नहीं
आँखों ने नींद छोड़ के सपने सजा लिये
जल्दी से इंतज़ार का मौसम तमाम हो
जी चाहता है आज ये जल्दी से शाम हो
इस बेक़रार दिल को कहाँ तक सम्भालिये
आँगन में मेरे प्यार की बारात आयेगी
था जिसका इंतज़ार वही रात आयेगी
ख़ाबों में ताजमहल वफ़ा के बना लिये
Aap To Aise Na The
खुदा ही जुदा करे तो करे,
कोई ताकत जुदा हमको नहीं कर पाएगी
कमसिन हो हसीना हो, वो हुस्न का चाहे नगीना हो
हो कोई सूरत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
हम खूबियों के भी आशिक़, हम गोरियाँ के भी शैदा
एक दूसरे के लिये ही, हमें रब ने किया जैसे पैदा
वो चाहे रखे अमीरी में, वो चाहे रखे फ़कीरी में
हो कोई हालत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
भूले से कोई परी जो, हम दोनों को भाने लगेगी
वो बीच में दो दिलों के, कभी दीवार बन ना सकेगी
हम तेरे लिये तो जहाँ छोड़ दें, परियाँ तो क्या हम जाँ छोड़ दें
हो पूरी जन्नत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
हमप्याला और हमनिवाला, हमराही हमराज़ हमदम
हम जो गिरें थामना तुम, तुम जो गिरो थामेंगे हम
तूफ़ान हो चाहे किनारा हो, एक दूसरे का सहारा हो
हो कोई आगत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
कोई ताकत जुदा हमको नहीं कर पाएगी
कमसिन हो हसीना हो, वो हुस्न का चाहे नगीना हो
हो कोई सूरत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
हम खूबियों के भी आशिक़, हम गोरियाँ के भी शैदा
एक दूसरे के लिये ही, हमें रब ने किया जैसे पैदा
वो चाहे रखे अमीरी में, वो चाहे रखे फ़कीरी में
हो कोई हालत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
भूले से कोई परी जो, हम दोनों को भाने लगेगी
वो बीच में दो दिलों के, कभी दीवार बन ना सकेगी
हम तेरे लिये तो जहाँ छोड़ दें, परियाँ तो क्या हम जाँ छोड़ दें
हो पूरी जन्नत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
हमप्याला और हमनिवाला, हमराही हमराज़ हमदम
हम जो गिरें थामना तुम, तुम जो गिरो थामेंगे हम
तूफ़ान हो चाहे किनारा हो, एक दूसरे का सहारा हो
हो कोई आगत जुदा हमको नहीं कर पाएगी, खुदा ही ...
पहले भी जीते थे मगर जबसे मिली है ज़िंदगी
सीधी नहीं है दूर तक उलझी हुई है ज़िंदगी
अच्छी भली थी दूर से जब पास आई खो गई
जिसमें न आये कुछ नज़र वो रोशनी है ज़िंदगी
हर रास्ता अन्जान सा हर फलसफ़ा नादान सा
सदियों पुरानी है मगर हर दिन नई है ज़िंदगी
मिट्टी हवा बन कर उड़ी घूमी फिरी वापस मुड़ी
क़बरों पे क़तबों की तरह लिक्खी हुई है ज़िंदगी
सीधी नहीं है दूर तक उलझी हुई है ज़िंदगी
अच्छी भली थी दूर से जब पास आई खो गई
जिसमें न आये कुछ नज़र वो रोशनी है ज़िंदगी
हर रास्ता अन्जान सा हर फलसफ़ा नादान सा
सदियों पुरानी है मगर हर दिन नई है ज़िंदगी
मिट्टी हवा बन कर उड़ी घूमी फिरी वापस मुड़ी
क़बरों पे क़तबों की तरह लिक्खी हुई है ज़िंदगी
कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे
समझे न जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे
फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोख़ तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे
इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे ग़ैरों का और अपनी कहानी कह देंगे
मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफ़ान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे
समझे न जिसे तुम आँखों से वो बात ज़बानी कह देंगे
फूलों की तरह जब होंठों पर इक शोख़ तबस्सुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में इक बात पुरानी कह देंगे
इज़हार-ए-वफ़ा तुम क्या समझो इक़रार-ए-वफ़ा तुम क्या जानो
हम ज़िक्र करेंगे ग़ैरों का और अपनी कहानी कह देंगे
मौसम तो बड़ा ही ज़ालिम है तूफ़ान उठाता रहता है
कुछ लोग मगर इस हलचल को बदमस्त जवानी कह देंगे
कहीं तारे कहीं शबनम कहीं जुगनू निकले
सारे मंज़र तेरी आवाज़ के जादू निकले
ज़िंदगी हम जिये औरों की ख़ुशी की ख़ातिर
भीड़ में हँस दिये तन्हाई में आँसू निकले
तेरे होंठों पे चमक उट्ठे मेरा नाम कभी
और मेरी ग़ज़लों के परदों से कभी तू निकले
जब भी याद आ गया वो साँवला चेहरा ''''''''राशिद''''''''
आँखों में फूल खिले साँसों से ख़ुश्बू निकले
सारे मंज़र तेरी आवाज़ के जादू निकले
ज़िंदगी हम जिये औरों की ख़ुशी की ख़ातिर
भीड़ में हँस दिये तन्हाई में आँसू निकले
तेरे होंठों पे चमक उट्ठे मेरा नाम कभी
और मेरी ग़ज़लों के परदों से कभी तू निकले
जब भी याद आ गया वो साँवला चेहरा ''''''''राशिद''''''''
आँखों में फूल खिले साँसों से ख़ुश्बू निकले
Aabshaar-E-Ghazal
दर्द दिल में उठा सोचते सोचते
या क्या आ गया सोचते सोचते
कौन था क्या था वो याद आता नहीं
याद आ जायेगा सोचते सोचते
राह में रह गई आने वाली सहर
बुझ गया हर दिया सोचते सोचते
अजनबी लोग हैं अजनबी रास्ते
मैं कहाँ आ गया सोचते सोचते
दूर हो कर न हम-तुम क़रीब आ सके
बढ़ गया फ़ासला सोचते सोचते
या क्या आ गया सोचते सोचते
कौन था क्या था वो याद आता नहीं
याद आ जायेगा सोचते सोचते
राह में रह गई आने वाली सहर
बुझ गया हर दिया सोचते सोचते
अजनबी लोग हैं अजनबी रास्ते
मैं कहाँ आ गया सोचते सोचते
दूर हो कर न हम-तुम क़रीब आ सके
बढ़ गया फ़ासला सोचते सोचते
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