सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो
किसीके वासते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
यहाँ किसीको कोई रासता नहीं देता
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो
यही है ज़िंदगी, कुछ ख़ाक चंद उम्मीदें
इन्ही खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
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Friday, October 3, 2008
Sunday, September 28, 2008
हम को दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजिये
प्यार ही प्यार हैं हम, हम पे भरोसा कीजिये
चंद यादों के सिवा हाथ न कुछ आयेगा
इस तरह उम्र-ए-गुज़रा का न पीछा कीजिये
रोश्नी औरों के आँगन में गवारा न सही
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजिये
क्या ख़बर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिये
रोज़ पल्कों पे नई शम्में जलाया कीजिये
प्यार ही प्यार हैं हम, हम पे भरोसा कीजिये
चंद यादों के सिवा हाथ न कुछ आयेगा
इस तरह उम्र-ए-गुज़रा का न पीछा कीजिये
रोश्नी औरों के आँगन में गवारा न सही
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजिये
क्या ख़बर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिये
रोज़ पल्कों पे नई शम्में जलाया कीजिये
Thursday, September 25, 2008
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