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Thursday, February 11, 2010

मै रात भर रोशनी को ढूढ़ता रहा, सूरज दिन भर मेरी राह देखता रहा

सागर था मेरे पास पर प्यासा भटकता रहा, शब्द थे मेरे पास फिर भी अटकता रहा | original dil-se