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Tuesday, January 27, 2009

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें
चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे
शलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें
तसवीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी
ये तेरी तरह मुझ से तो शर्मा न सकेगी
तसवीर तेरी ...

मैं बात करूँगा तो ये खामोश रहेगी
सीने से लगा लूँगा तो ये कुछ न कहेगी
आराम वो क्या देगी जो तड़पा न सकेगी
तसवीर तेरी ...

ये आँखें हैं ठहरी हुई चंचल वो निगाहें
ये हाथ हैं सहमे हुए और मस्त वो बाहें
पर्छाईं तो इंसान के काम आ न सकेगी
तसवीर तेरी ...

इन होंठों को फ़ैय्याज़ मैं कुछ दे न सकूँगा
इस ज़ुल्फ़ को मैं हाथ में भी ले न सकूँगा
उलझी हुई रातों को ये सुलझा न सकेगी
तसवीर तेरी ...

Thursday, November 27, 2008

Unknown

मरने का तेरे गम में इरादा भी नहीं है,
है इश्क मगर, इतना ज़्यादा भी नहीं है|

है यूकि इबादत की जुबा और है कोई,
कागज मेरी तकदीर का, सदा भी नहीं है|

क्यो देखते रहते है,सितारों की तरफ़ हम,
जब उनसे मुलाकात का वादा भी नहीं है|

क्यो रह के मंजर में उलझ जाती है आँखे,
जब दिल में कोई और इरादा भी नहीं है|