ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था
दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था
मुआफ़ कर ना सकी मेरी ज़िन्दगी मुझको
वो एक लम्हा कि मैं तुझसे तंग आया था
शगुफ़्ता फूल सिमट कर कली बने जैसे
कुछ इस तरह से तूने बदन चुराया था
गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर की तरह
अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था
पता नहीं कि मेरे बाद उनपे क्या गुज़री
मैं चाँद ख्वाब ज़माने में छोड़ आया था
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Wednesday, October 8, 2008
तू मेरे साथ चल न पाएगी
जब मेरी राह तेरी राह से मिलती ही नहीं
फिर मेरा साथ निभाने की ज़रूरत क्या है
अपनी मासूम तमन्नाओं को रैबार ना बना
ख़्वाब फिर ख़्वाब हैं लबों की हक़ीकत क्या है
ये नई राह तुझे रास नहीं आएगी
मैने माना कि तुझे मुझसे मुहब्बत है मगर
मेरी गुर्बत तेरी चाहत का दिला क्या देगी
अपनी मेहरुमि-ए-किस्मत से परेशान हूँ मैं
बेबसी अश्क़-ए-नदामत के सिवा क्या देगी
वक़्त की धूप में हर चीज़ झुलस जएगी
तू मेरे साथ चल न पाएगी
जब मेरी राह तेरी राह से मिलती ही नहीं
फिर मेरा साथ निभाने की ज़रूरत क्या है
अपनी मासूम तमन्नाओं को रैबार ना बना
ख़्वाब फिर ख़्वाब हैं लबों की हक़ीकत क्या है
ये नई राह तुझे रास नहीं आएगी
मैने माना कि तुझे मुझसे मुहब्बत है मगर
मेरी गुर्बत तेरी चाहत का दिला क्या देगी
अपनी मेहरुमि-ए-किस्मत से परेशान हूँ मैं
बेबसी अश्क़-ए-नदामत के सिवा क्या देगी
वक़्त की धूप में हर चीज़ झुलस जएगी
तू मेरे साथ चल न पाएगी
तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर
ये आज़माइश ना बार होगी
मैं जानता हूँ मुझे खबर है
कि कल फ़ज़ा खुशगवार होगी
रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर
रहेगी ये कशमकश बराबर
ना तुमको क़ुरबत में जीत होगी
ना मुझको फ़ुरक़त में हार होगी
हज़ार उल्फ़त सताये लेकिन
मेरे इरादों से है ये मुमकिन
अगर शराफ़त को तुमने छेड़ा
तो ज़िन्दगी तुम पे वार होगी
ये आज़माइश ना बार होगी
मैं जानता हूँ मुझे खबर है
कि कल फ़ज़ा खुशगवार होगी
रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर
रहेगी ये कशमकश बराबर
ना तुमको क़ुरबत में जीत होगी
ना मुझको फ़ुरक़त में हार होगी
हज़ार उल्फ़त सताये लेकिन
मेरे इरादों से है ये मुमकिन
अगर शराफ़त को तुमने छेड़ा
तो ज़िन्दगी तुम पे वार होगी
Sunday, September 28, 2008
हाँ मैं दीवाना हूँ चाहूँ तो मचल सकता हूँ
खिलावत-ए-हुस्न के कानून बदल सकता हूँ
खार तो खार हैं अंगारों पे चल सकता हूँ
मेरे महबूब मेरे दोस्त नहीं ये भी नहीं
मेरी बेबाक तबीयत का तकाज़ा है कुछ और
इसी रफ़्तार से दुनिया को गुज़र जाने दूँ
दिल में घुट घुट के तमन्नाओं को मर जाने दूँ
तेरी ज़ुल्फ़ों को सर-ए-दोश बिखर जाने दूँ
एक दिन छीन लूं मैं अज़मत-ए-बासिल का जुनून
तोड़ दूँ तोड़ दूँ मैं शौख से दुनिया का खुस (?)
और बह जाये यूं ही नफ़्ज़-ए-ज़ारोसीम का खून
गैरत-ए-इश्क़ को मन्ज़ूर तमाशा है यही
मेरी फ़ितरत का मेरे दोस्त तकाज़ा है यही
खिलावत-ए-हुस्न के कानून बदल सकता हूँ
खार तो खार हैं अंगारों पे चल सकता हूँ
मेरे महबूब मेरे दोस्त नहीं ये भी नहीं
मेरी बेबाक तबीयत का तकाज़ा है कुछ और
इसी रफ़्तार से दुनिया को गुज़र जाने दूँ
दिल में घुट घुट के तमन्नाओं को मर जाने दूँ
तेरी ज़ुल्फ़ों को सर-ए-दोश बिखर जाने दूँ
एक दिन छीन लूं मैं अज़मत-ए-बासिल का जुनून
तोड़ दूँ तोड़ दूँ मैं शौख से दुनिया का खुस (?)
और बह जाये यूं ही नफ़्ज़-ए-ज़ारोसीम का खून
गैरत-ए-इश्क़ को मन्ज़ूर तमाशा है यही
मेरी फ़ितरत का मेरे दोस्त तकाज़ा है यही
Thursday, September 25, 2008
तेरे लबों के मुकाबिल गुलाब क्या होगा
तू लाजवाब है तेरा जवाब क्या होगा
तेरी अदा पे फ़िदा हम तो क्या ज़माना है
निसार तुझपे मेरे दिल का ये खज़ाना है
तेरे शबाब से बढ़ कर शबाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
तू मुस्कुराए तो जाती बहार आ जाये
दिल-ए-बीमार को फिर से क़रार आ जाये
तेरे करम का किसीसे हिसाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
तू लाजवाब है तेरा जवाब क्या होगा
तेरी अदा पे फ़िदा हम तो क्या ज़माना है
निसार तुझपे मेरे दिल का ये खज़ाना है
तेरे शबाब से बढ़ कर शबाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
तू मुस्कुराए तो जाती बहार आ जाये
दिल-ए-बीमार को फिर से क़रार आ जाये
तेरे करम का किसीसे हिसाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
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