अपना ग़म भूल गये, तेरी जफ़ा भूल गये
हम तो हर बात मुहब्बत के सिवा भूल गये
हम अकेले ही नहीं प्यार के दीवाने, सनम
आप भी नज़्रें झुकाने की 'अदा भूल गये
अब तो सोचा है कि दामन ही तेर थामेंगे
हाथ जब हम ने उठाये हैं दुआ भूल गये
शुक्र सम्झो या इसे अपनी शिकायत सम्झो
तुम ने वो दर्द दिया है कि दवा भूल गये
Showing posts with label Farouq Qaiser. Show all posts
Showing posts with label Farouq Qaiser. Show all posts
Thursday, September 25, 2008
Subscribe to:
Comments (Atom)
