मैं अकेला नहीं चलता,
साथ सवालों के काफिले चलते हैं।
होती हैं ढेरों बातें मन में
खुली आंखों में भी ख्वाब पलते हैं।
मन के आंगन में अक्सर
उमंगों के सूर्या उदय हो ढलते हैं।
करता हूं बातें जब खुद से
कहकर पागल लोग निकलते हैं।
वो क्या जाने दिल समद्र में
कितने लहरों से ख्याल मचलते हैं।

1 comment:
ज्योति पर्व के अवसर पर आप सभी को लोकसंघर्ष परिवार की तरफ हार्दिक शुभकामनाएं।
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