Tuesday, January 27, 2009

तसवीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी
ये तेरी तरह मुझ से तो शर्मा न सकेगी
तसवीर तेरी ...

मैं बात करूँगा तो ये खामोश रहेगी
सीने से लगा लूँगा तो ये कुछ न कहेगी
आराम वो क्या देगी जो तड़पा न सकेगी
तसवीर तेरी ...

ये आँखें हैं ठहरी हुई चंचल वो निगाहें
ये हाथ हैं सहमे हुए और मस्त वो बाहें
पर्छाईं तो इंसान के काम आ न सकेगी
तसवीर तेरी ...

इन होंठों को फ़ैय्याज़ मैं कुछ दे न सकूँगा
इस ज़ुल्फ़ को मैं हाथ में भी ले न सकूँगा
उलझी हुई रातों को ये सुलझा न सकेगी
तसवीर तेरी ...

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