Thursday, November 27, 2008

Unknown

मरने का तेरे गम में इरादा भी नहीं है,
है इश्क मगर, इतना ज़्यादा भी नहीं है|

है यूकि इबादत की जुबा और है कोई,
कागज मेरी तकदीर का, सदा भी नहीं है|

क्यो देखते रहते है,सितारों की तरफ़ हम,
जब उनसे मुलाकात का वादा भी नहीं है|

क्यो रह के मंजर में उलझ जाती है आँखे,
जब दिल में कोई और इरादा भी नहीं है|

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