Thursday, September 25, 2008

तेरे लबों के मुकाबिल गुलाब क्या होगा
तू लाजवाब है तेरा जवाब क्या होगा

तेरी अदा पे फ़िदा हम तो क्या ज़माना है
निसार तुझपे मेरे दिल का ये खज़ाना है
तेरे शबाब से बढ़ कर शबाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...

तू मुस्कुराए तो जाती बहार आ जाये
दिल-ए-बीमार को फिर से क़रार आ जाये
तेरे करम का किसीसे हिसाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...

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