Wednesday, October 8, 2008

तू मेरे साथ चल न पाएगी
जब मेरी राह तेरी राह से मिलती ही नहीं
फिर मेरा साथ निभाने की ज़रूरत क्या है
अपनी मासूम तमन्नाओं को रैबार ना बना
ख़्वाब फिर ख़्वाब हैं लबों की हक़ीकत क्या है
ये नई राह तुझे रास नहीं आएगी

मैने माना कि तुझे मुझसे मुहब्बत है मगर
मेरी गुर्बत तेरी चाहत का दिला क्या देगी
अपनी मेहरुमि-ए-किस्मत से परेशान हूँ मैं
बेबसी अश्क़-ए-नदामत के सिवा क्या देगी
वक़्त की धूप में हर चीज़ झुलस जएगी
तू मेरे साथ चल न पाएगी

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