जीते रहने की सज़ा दे जिंदगी ऐ जिंदगी
अब तो मरने की दुआ दे जिंदगी ऐ जिंदगी
मैं तो अब उकता गया हूँ क्या यही है कायनात
बस ये आईना हटा दे जिंदगी ऐ जिंदगी
ढूडने े निकला था तुझ को और ख़ुद को खो दिया
तू ही अब मेरा पता दे जिंदगी ऐ जिंदगी
या मुझे एहसास की इस क़ैद से कर दे रिहा
वरना दीवाना बना दे जिंदगी ऐ जिंदगी
Monday, October 13, 2008
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