आँचल में फूल चाँद सितारे सजा लिये
नैनों में मैंने आस के दीपक जला लिये
सुनते ही उनका नाम मेरा दिल धड़क उठा
कजरा लहक उठा मेरा गजरा महक उठा
दुनिया ने दिल के भेद निगाहों से पा लिये
करते हैं सब ही प्यार मगर इस कदर नहीं
हम उनके कब हुये ये हमें ख़ुद ख़बर नहीं
आँखों ने नींद छोड़ के सपने सजा लिये
जल्दी से इंतज़ार का मौसम तमाम हो
जी चाहता है आज ये जल्दी से शाम हो
इस बेक़रार दिल को कहाँ तक सम्भालिये
आँगन में मेरे प्यार की बारात आयेगी
था जिसका इंतज़ार वही रात आयेगी
ख़ाबों में ताजमहल वफ़ा के बना लिये
Friday, October 3, 2008
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