आँख खुलते ही तुम छुप गये हो कहाँ
तुम अभी थे यहाँ, तुम अभी थे यहाँ
अभी साँसों की खुश्बू हवाओन में है
अभी कदमों की आहट फ़िज़ाओं में है
अभी शाखों पे है उंगलियों के निशाँ
तुम अभी थे यहाँ, तुम अभी थे यहाँ
आँख खुलते ही तुम ...
तुम जुदा होके भी मेरी राहों में हो
गर्म अश्कों में हो, सर्द आहों में हो
चाँदनी में झलकती हैं पर्छाइयाँ
तुम अभी थे यहाँ, तुम अभी थे यहाँ
आँख खुलते ही तुम ...
Tuesday, November 4, 2008
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