बदले बदले मेरे सरकर नज़र आते हैं
घर की बरबादी के आसार नज़र आते हैं
मेरे मालिक ने मुहब्बत का चलन छोड़ दिया
कर के बरबाद उम्मीदों का चमन छोड़ दिया
फूल भी अब तो ख़ार नज़र आते हैं
डूबे रहते थे मेरे प्यार में जो शाम-ओ-सहर
मेरे चेहरे से नहीं हटती थी कभी जिनकी नज़र
मेरी सूरत से ही बेज़ार नज़र आते हैं
Wednesday, October 8, 2008
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