कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है,
सामना आज उनसे होना है
तोड़ो, फेंकों, रखो, करो कुछ भी,
दिल हमारा है, क्या खिलौना है
ज़िंदगी और मौत का मतलब,
तुमको पाना है, तुमको खोना है
इतना डरना भी क्या है दुनिया से,
जो भी होना है सो तो होना है
उठ के महफ़िल से मत चले जाना,
तुमसे रोशन ये कोना-कोना है
Sunday, September 28, 2008
हम को दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजिये
प्यार ही प्यार हैं हम, हम पे भरोसा कीजिये
चंद यादों के सिवा हाथ न कुछ आयेगा
इस तरह उम्र-ए-गुज़रा का न पीछा कीजिये
रोश्नी औरों के आँगन में गवारा न सही
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजिये
क्या ख़बर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिये
रोज़ पल्कों पे नई शम्में जलाया कीजिये
प्यार ही प्यार हैं हम, हम पे भरोसा कीजिये
चंद यादों के सिवा हाथ न कुछ आयेगा
इस तरह उम्र-ए-गुज़रा का न पीछा कीजिये
रोश्नी औरों के आँगन में गवारा न सही
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजिये
क्या ख़बर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिये
रोज़ पल्कों पे नई शम्में जलाया कीजिये
ये रात जैसे दुल्हन बन गई है चिरागों से
करुंगा उजाला मैं दिल के दाग़ों से
आज की रात मेरे, दिल की सलामी ले ले
दिल की सलामी ले ले
कल तेरी बज़्म से दीवाना चला जाएगा
शम्मा रहे जाएगी परवाना चला जाएगा
तेरी महफ़िल तेरे जलवे हों मुबारक तुझको
तेरी उल्फ़त से नहीं आज भी इनकार मुझे
तेरा मय-खाना सलामत रहे ऐ जान-ए-वफ़ा
मुस्कुराकर तू ज़रा देख ले इक बार मुझे
फिर तेरे प्यार का मस्ताना चला जाएगा
मैने चाहा कि बता दूँ मैं हक़ीक़त अपनी
तूने लेकिन न मेरा राज़-ए-मुहब्बत समझा
मेरी उलझन मेरे हालात यहाँ तक पहुंचे
तेरी आँखों ने मेरे प्यार को नफ़रत समझा
अब तेरी राह से बेगाना चला जाएगा
तू मेरा साथ न दे राह-ए-मुहब्बत में सनम
चलते-चलते मैं किसी राह पे मुड़ जाऊंगा
कहकशां चांद सितारे तेरे चूमेंगे क़दम
तेरे रस्ते की मैं एक धूल हूँ उड़ जाऊंगा
साथ मेरे मेरा अफ़साना चला जाएगा
करुंगा उजाला मैं दिल के दाग़ों से
आज की रात मेरे, दिल की सलामी ले ले
दिल की सलामी ले ले
कल तेरी बज़्म से दीवाना चला जाएगा
शम्मा रहे जाएगी परवाना चला जाएगा
तेरी महफ़िल तेरे जलवे हों मुबारक तुझको
तेरी उल्फ़त से नहीं आज भी इनकार मुझे
तेरा मय-खाना सलामत रहे ऐ जान-ए-वफ़ा
मुस्कुराकर तू ज़रा देख ले इक बार मुझे
फिर तेरे प्यार का मस्ताना चला जाएगा
मैने चाहा कि बता दूँ मैं हक़ीक़त अपनी
तूने लेकिन न मेरा राज़-ए-मुहब्बत समझा
मेरी उलझन मेरे हालात यहाँ तक पहुंचे
तेरी आँखों ने मेरे प्यार को नफ़रत समझा
अब तेरी राह से बेगाना चला जाएगा
तू मेरा साथ न दे राह-ए-मुहब्बत में सनम
चलते-चलते मैं किसी राह पे मुड़ जाऊंगा
कहकशां चांद सितारे तेरे चूमेंगे क़दम
तेरे रस्ते की मैं एक धूल हूँ उड़ जाऊंगा
साथ मेरे मेरा अफ़साना चला जाएगा
हाँ मैं दीवाना हूँ चाहूँ तो मचल सकता हूँ
खिलावत-ए-हुस्न के कानून बदल सकता हूँ
खार तो खार हैं अंगारों पे चल सकता हूँ
मेरे महबूब मेरे दोस्त नहीं ये भी नहीं
मेरी बेबाक तबीयत का तकाज़ा है कुछ और
इसी रफ़्तार से दुनिया को गुज़र जाने दूँ
दिल में घुट घुट के तमन्नाओं को मर जाने दूँ
तेरी ज़ुल्फ़ों को सर-ए-दोश बिखर जाने दूँ
एक दिन छीन लूं मैं अज़मत-ए-बासिल का जुनून
तोड़ दूँ तोड़ दूँ मैं शौख से दुनिया का खुस (?)
और बह जाये यूं ही नफ़्ज़-ए-ज़ारोसीम का खून
गैरत-ए-इश्क़ को मन्ज़ूर तमाशा है यही
मेरी फ़ितरत का मेरे दोस्त तकाज़ा है यही
खिलावत-ए-हुस्न के कानून बदल सकता हूँ
खार तो खार हैं अंगारों पे चल सकता हूँ
मेरे महबूब मेरे दोस्त नहीं ये भी नहीं
मेरी बेबाक तबीयत का तकाज़ा है कुछ और
इसी रफ़्तार से दुनिया को गुज़र जाने दूँ
दिल में घुट घुट के तमन्नाओं को मर जाने दूँ
तेरी ज़ुल्फ़ों को सर-ए-दोश बिखर जाने दूँ
एक दिन छीन लूं मैं अज़मत-ए-बासिल का जुनून
तोड़ दूँ तोड़ दूँ मैं शौख से दुनिया का खुस (?)
और बह जाये यूं ही नफ़्ज़-ए-ज़ारोसीम का खून
गैरत-ए-इश्क़ को मन्ज़ूर तमाशा है यही
मेरी फ़ितरत का मेरे दोस्त तकाज़ा है यही
ग़म बड़े आते हैं कातिल की निगाहों की तरह
तुम छिपा लो मुझे, ऐ दोस्त, गुनाहों की तरह
अपनी नज़रों में गुनहगार न होते, क्यों कर
दिल ही दुश्मन हैं मुखालिफ़ के ग्वाहों की तरह
हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्त
बस तेरी याद का साया है पनाहों की तरह
जिनके ख़ातिर कभी इल्ज़ाम उठाए, 'फ़ाकिर'
वो भी पेश आए हैं इनसाफ़ के शाहों की तरह
तुम छिपा लो मुझे, ऐ दोस्त, गुनाहों की तरह
अपनी नज़रों में गुनहगार न होते, क्यों कर
दिल ही दुश्मन हैं मुखालिफ़ के ग्वाहों की तरह
हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्त
बस तेरी याद का साया है पनाहों की तरह
जिनके ख़ातिर कभी इल्ज़ाम उठाए, 'फ़ाकिर'
वो भी पेश आए हैं इनसाफ़ के शाहों की तरह
अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला
इर्फ़ान-ए-ग़म हुआ मुझे दिल का पता मिला
जब दूर तक न कोई फ़कीर आशना मिला
तेरा नियाज़मंद तेरे दर से जा मिला
मन्ज़िल मिली, मुराद मिली, मुद्दा मिला
सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक़्श-ए-पा मिला
या ज़ख़्म-ए-दिल को चीर के सीने से फेंक दे
या ऐतराफ़ कर कि निशान-ए-वफ़ा मिला
सीमाब को शगुफ़्ता न देखा तमाम उम्र
कम्बख़्त जब मिला हमें ग़म आशना मिला
इर्फ़ान-ए-ग़म हुआ मुझे दिल का पता मिला
जब दूर तक न कोई फ़कीर आशना मिला
तेरा नियाज़मंद तेरे दर से जा मिला
मन्ज़िल मिली, मुराद मिली, मुद्दा मिला
सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक़्श-ए-पा मिला
या ज़ख़्म-ए-दिल को चीर के सीने से फेंक दे
या ऐतराफ़ कर कि निशान-ए-वफ़ा मिला
सीमाब को शगुफ़्ता न देखा तमाम उम्र
कम्बख़्त जब मिला हमें ग़म आशना मिला
Friday, September 26, 2008
Dev Anand's BirthDay
DEV ANAND is the 'Evergreen Romantic Superstar' of Indian Cinema. Just the mention of his name conjures up images of youthfulness, romance, style, and extremely good looks in the minds of his millions of fans and admirers the world over. After having played the Lead Actor for more than Five Decades in over 110 motion pictures, the awe-inspiring DEV ANAND continues to bestride Indian Cinema today. He has given a new dimension to that magical state known as Stardom. For his exemplary work, he was recently awarded the PADMA BHUSHAN - a Title awarded to a person of extraordinary talent for his outstanding contribution and/or achievements in his discipline by the PRESIDENT OF INDIA.
To add to his glory, on 29th of December 2003, he was honoured with the prestigious 'DADA SAHEB PHALKE AWARD' for his outstanding contribution to Indian Cinema, by the President of India Mr. A P J ABDUL KALAM
The AWARD carries a cash prize of Rs 2 lakh, a SHAWL and a SWARNA KAMAL (Golden Lotus).
Thursday, September 25, 2008
तेरे लबों के मुकाबिल गुलाब क्या होगा
तू लाजवाब है तेरा जवाब क्या होगा
तेरी अदा पे फ़िदा हम तो क्या ज़माना है
निसार तुझपे मेरे दिल का ये खज़ाना है
तेरे शबाब से बढ़ कर शबाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
तू मुस्कुराए तो जाती बहार आ जाये
दिल-ए-बीमार को फिर से क़रार आ जाये
तेरे करम का किसीसे हिसाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
तू लाजवाब है तेरा जवाब क्या होगा
तेरी अदा पे फ़िदा हम तो क्या ज़माना है
निसार तुझपे मेरे दिल का ये खज़ाना है
तेरे शबाब से बढ़ कर शबाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
तू मुस्कुराए तो जाती बहार आ जाये
दिल-ए-बीमार को फिर से क़रार आ जाये
तेरे करम का किसीसे हिसाब क्या होगा
तेरे लबों के मुकाबिल...
तसवीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी
ये तेरी तरह मुझ से तो शर्मा न सकेगी
तसवीर तेरी ...
मैं बात करूँगा तो ये खामोश रहेगी
सीने से लगा लूँगा तो ये कुछ न कहेगी
आराम वो क्या देगी जो तड़पा न सकेगी
तसवीर तेरी ...
ये आँखें हैं ठहरी हुई चंचल वो निगाहें
ये हाथ हैं सहमे हुए और मस्त वो बाहें
पर्छाईं तो इंसान के काम आ न सकेगी
तसवीर तेरी ...
इन होंठों को फ़ैय्याज़ मैं कुछ दे न सकूँगा
इस ज़ुल्फ़ को मैं हाथ में भी ले न सकूँगा
उलझी हुई रातों को ये सुलझा न सकेगी
तसवीर तेरी ...
ये तेरी तरह मुझ से तो शर्मा न सकेगी
तसवीर तेरी ...
मैं बात करूँगा तो ये खामोश रहेगी
सीने से लगा लूँगा तो ये कुछ न कहेगी
आराम वो क्या देगी जो तड़पा न सकेगी
तसवीर तेरी ...
ये आँखें हैं ठहरी हुई चंचल वो निगाहें
ये हाथ हैं सहमे हुए और मस्त वो बाहें
पर्छाईं तो इंसान के काम आ न सकेगी
तसवीर तेरी ...
इन होंठों को फ़ैय्याज़ मैं कुछ दे न सकूँगा
इस ज़ुल्फ़ को मैं हाथ में भी ले न सकूँगा
उलझी हुई रातों को ये सुलझा न सकेगी
तसवीर तेरी ...
कल चौदहवीं की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा ये चाँद है
कुछ ने कहा चेहरा तेरा
१) हम भी वहीं मौजूद थे
हम से भी सब पूछा कि ये
हम हंस दिये हम चुप रहे
मंज़ूर था परदा तेरा, कल ...
२) इस शहर में किस से मिलें
हम से तो छूटी महफ़िलें
हर शख्स तेरा नाम ले
हर शख्स दीवाना तेरा, कल ...
३) कूचे को तेरे छोड़कर
जोगी ही बन जाएं मगर
जंगल तेरे पर्वत तेरे
बस्ती तेरी सेहरा तेरा, कल ...
४) बेदर्द तुम ही हो तो चल
कहता है क्या अच्छी गज़ल
आशिक़ तेरा रुसवा तेरा
शायर तेरा इन्शा तेरा, कल ...
शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा ये चाँद है
कुछ ने कहा चेहरा तेरा
१) हम भी वहीं मौजूद थे
हम से भी सब पूछा कि ये
हम हंस दिये हम चुप रहे
मंज़ूर था परदा तेरा, कल ...
२) इस शहर में किस से मिलें
हम से तो छूटी महफ़िलें
हर शख्स तेरा नाम ले
हर शख्स दीवाना तेरा, कल ...
३) कूचे को तेरे छोड़कर
जोगी ही बन जाएं मगर
जंगल तेरे पर्वत तेरे
बस्ती तेरी सेहरा तेरा, कल ...
४) बेदर्द तुम ही हो तो चल
कहता है क्या अच्छी गज़ल
आशिक़ तेरा रुसवा तेरा
शायर तेरा इन्शा तेरा, कल ...
ओ मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बात की, बिन चिठ्ठी बिन तार
छोटा करके देखिये, जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है, बाहों भर संसार
ए लेके तन के नाप को, घूमे बस्ती गाँव
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव
सबकी पूजा एक सी, अलग-वलग हर रीत
मस्जिद जाए मौल्वी, कोयल गाए गीत
पूजा घर में मूर्ती, मीर के संग श्याम
जिसकी जितनी चाकरी, उतने उसके दाम
सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या पीर
जिस दिन सोए देर तक, भूका रहे फ़कीर
अच्छी संगत बैठकर, संगी बदले रूप
जैसे मिलकर आम से, मीठी हो गई धूप
सपना झर्ना नींद का, जागी आँखें प्यास
पाना खोना खोजना, साँसों का इतिहास
चाहे गीता वाचिए, या पढ़िए क़ुरान
मेरा तेरा प्यार ही, हर पुस्तक का ज्ञान
दुख ने दुख से बात की, बिन चिठ्ठी बिन तार
छोटा करके देखिये, जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है, बाहों भर संसार
ए लेके तन के नाप को, घूमे बस्ती गाँव
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव
सबकी पूजा एक सी, अलग-वलग हर रीत
मस्जिद जाए मौल्वी, कोयल गाए गीत
पूजा घर में मूर्ती, मीर के संग श्याम
जिसकी जितनी चाकरी, उतने उसके दाम
सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या पीर
जिस दिन सोए देर तक, भूका रहे फ़कीर
अच्छी संगत बैठकर, संगी बदले रूप
जैसे मिलकर आम से, मीठी हो गई धूप
सपना झर्ना नींद का, जागी आँखें प्यास
पाना खोना खोजना, साँसों का इतिहास
चाहे गीता वाचिए, या पढ़िए क़ुरान
मेरा तेरा प्यार ही, हर पुस्तक का ज्ञान
कभी कभी यूँही हमने अपने जी को बहलाया है
जिन बातों को खुद नहीं समझे, औरों को समझाया है
हमसे पूछो इज़्ज़त वालों की इज़्ज़त का हाल कभी
हमने भी इस शहर में रहकर थोड़ा नाम कमाया है
उससे बिछड़े बरसों बीते, लेकिन आज न जाने क्यों
आँगन में हँसते बच्चों को बे-कारण धमकाया है
कोई मिला तो हाथ मिलाया, कहीं गए तो बातें की
घर से बाहर जब भी निकले, दिन भर बोझ उठाया है
जिन बातों को खुद नहीं समझे, औरों को समझाया है
हमसे पूछो इज़्ज़त वालों की इज़्ज़त का हाल कभी
हमने भी इस शहर में रहकर थोड़ा नाम कमाया है
उससे बिछड़े बरसों बीते, लेकिन आज न जाने क्यों
आँगन में हँसते बच्चों को बे-कारण धमकाया है
कोई मिला तो हाथ मिलाया, कहीं गए तो बातें की
घर से बाहर जब भी निकले, दिन भर बोझ उठाया है
Dil Se
भूल शायद बहुत बड़ी कर ली
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
तुम मुहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िन्दगी कर ली
उस ने देखा बड़ी इनायत से
आँखों आँखों में बात भी कर ली
आशिकी में बहुत ज़रूरी है
बेवफाई कभी कभी कर ली
हम नहीं जानते चिरागों ने
क्यों अंधेरों से दोस्ती कर ली
धड़कनें दफन हो गई होंगी
दिल में दीवार क्यों खडी कर ली
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
तुम मुहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िन्दगी कर ली
उस ने देखा बड़ी इनायत से
आँखों आँखों में बात भी कर ली
आशिकी में बहुत ज़रूरी है
बेवफाई कभी कभी कर ली
हम नहीं जानते चिरागों ने
क्यों अंधेरों से दोस्ती कर ली
धड़कनें दफन हो गई होंगी
दिल में दीवार क्यों खडी कर ली
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