Thursday, September 25, 2008

कल चौदहवीं की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा ये चाँद है
कुछ ने कहा चेहरा तेरा

१) हम भी वहीं मौजूद थे
हम से भी सब पूछा कि ये
हम हंस दिये हम चुप रहे
मंज़ूर था परदा तेरा, कल ...

२) इस शहर में किस से मिलें
हम से तो छूटी महफ़िलें
हर शख्स तेरा नाम ले
हर शख्स दीवाना तेरा, कल ...

३) कूचे को तेरे छोड़कर
जोगी ही बन जाएं मगर
जंगल तेरे पर्वत तेरे
बस्ती तेरी सेहरा तेरा, कल ...

४) बेदर्द तुम ही हो तो चल
कहता है क्या अच्छी गज़ल
आशिक़ तेरा रुसवा तेरा
शायर तेरा इन्शा तेरा, कल ...

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