अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला
इर्फ़ान-ए-ग़म हुआ मुझे दिल का पता मिला
जब दूर तक न कोई फ़कीर आशना मिला
तेरा नियाज़मंद तेरे दर से जा मिला
मन्ज़िल मिली, मुराद मिली, मुद्दा मिला
सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक़्श-ए-पा मिला
या ज़ख़्म-ए-दिल को चीर के सीने से फेंक दे
या ऐतराफ़ कर कि निशान-ए-वफ़ा मिला
सीमाब को शगुफ़्ता न देखा तमाम उम्र
कम्बख़्त जब मिला हमें ग़म आशना मिला
Sunday, September 28, 2008
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