कितनी मुद्दत बाद मिले हो
किन सोचों में गुम रहते हो
कौनसी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यों लगते हो
हमसे न पूछो हिज्र के किस्से
अपनी कहो, अब तुम कैसे हो
तेज़ हवा ने मुझसे पूछा,
रेत पे क्या लिखते रहते हो
Thursday, September 25, 2008
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