Tuesday, November 4, 2008

ये रात ये तन्हाई

ये दिल के धड़कने की आवाज़


ये सन्नाटा

ये डूबते तारॊं की


खा़मॊश गज़ल खवानी

ये वक्त की पलकॊं पर


सॊती हुई वीरानी

जज्बा़त ऎ मुहब्बत की


ये आखिरी अंगड़ाई

बजाती हुई हर जानिब


ये मौत की शहनाई

सब तुम कॊ बुलाते हैं


पल भर को तुम आ जाओ

बंद होती मेरी आँखों में


मुहब्बत का

एक ख्वाब़ सजा जाओ

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