Friday, October 3, 2008

जवानी के हीले, हया के बहाने
ये मान के तुम मुझसे पर्दआ करोगी
ये दुनिया मगर तुझसी भोली नहीं है
छुपकर मुहब्बत को रुसवा करोगी

बड़ी कोशिशों से, बड़ी ख़्वाहिशों से
तमन्ना के सहमी हुई साज़िशोण से
मिलेगा जो मौका, तो बेचैन होकर
दरीचों से तुम मुझको देखा करोगी

सतायेगी जब चाँदनी की उदासी
दुखायेगी दिल फ़िज़ा की खमोशी
उफ़क़ की तरफ़ खाली नज़रें जमाकर
कभी जो न सोचा वो सोचा करोगी

कभी दिल की धड़कन महसूस होगी
कभी ठण्डी साँसोण के तूफ़ान उठेंगे
कभी गिर के बिस्तर पे आहें भरोगी
कभी झुक के तकिये पे रोया करोगी

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