कोई जब रूप धरता हूँ, तो साँसे टूट जाते है,
मैं रोता हूँ तो आकर लोग कन्धा थपथपाते हैं,
मैं हँसता हूँ तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते हैं.
बहुत बिखरा बहुत टूटा,थपेडे सह नही पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नही पाया,
अधुरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का किस्सा,
कभी तू सुन नही पायी कभी मैं कह नही पाया.

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