Saturday, October 4, 2008

जिंदगी तुझ से मिल कर ज़माना हुआ
आ तुझे आज हम मैकदे ले चलें
रात के नाम होंठों के सागर लिखें
अपनी आँखों में कुछ रात-जगे ले चलें
क्या हसीन लोग हैं

आँख आहों की हैं और लब पंख्ड़ी 
इन की आराइश-ए-खल-ओ-ख़त के लिए
अपनी आँखों के हम आईने ले चलें
अजनबी चहरे में दोस्त बनाते नहीं
रिश्ते-नातों की चांदी बरसती नहीं

कुर्बतें सोहाबतें जिन की याद आयेंगी
ऐसे कुछ दोस्तों के पते ले चलें
उन की आँखों ने जलाते सुलगते हुए
मंज़रों के सिवा कुछ भी देखा नहीं
चेहरा-ए-अफ़सोस के सकिनों के लिए
फूल-ओ-खुश्बू सबा जाम-जामें ले चलें

जिंदगी तुझ से मिल कर ज़माना हुआ

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