Friday, October 3, 2008

Sath Sath

तुम को देखा तो ये ख़याल आया
ज़िंदगी धूप तुम घना साया
तुम को...

आज फिर दिलने एक तमन्ना की - (२)
आज फिर दिलको हमने समझाया
ज़िंदगी धूप तुम घना साया...

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे - (२)
हमने क्या खोया, हमने क्या पाया
ज़िंदगी धूप तुम घना साया...

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते - (२)
वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया
ज़िंदगी धूप तुम घना साया...

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