हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला
उस को रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया, घर छोड़ के जाने वाला
इक मुसाफिर के सफर जैसी है सब की दुनिया
कोई जल्दी में कोई देर से जाने वाला
एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा-चेहरा
जिस तरफ़ देखिये आने को है आने वाला

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