अपने चहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे
तेरी मर्जी की मुताबिक नज़र आयें कैसे
घर सजाने का तस्सवुर तो बहुत बाद का है
पहले ये तय हो की इस घर को बचाएँ कैसे
कह-कहा आँख की बरताव बदल देता है
हंसनेवाले तुझे आंसू नज़र आयें कैसे
कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा
एक कतरे को समुन्दर नज़र आयें कैसे
Saturday, October 4, 2008
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