Wednesday, October 15, 2008

"कोई दीवाना कहता है
कोई पागल समझता है 
मगर धरती की बेचैनी को 
बस बदल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ 
तू मुझसे दूर कैसी है 
ये तेरा दिल समझता है 
या मेरा दिल समझता है"

"मोहब्बत एक एहसासों की 
पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था 
कभी मीरा दीवानी थी 
यहाँ सब लोग कहते है 
मेरी आँखों में आंसू है 
जो तू समझे तो मोती है 
जो ना समझे तो पानी है"

"समंदर पीर के अंदर है 
लेकिन रो नहीं सकता 
ये आंसू प्यार का मोती है 
इसको खो नहीं सकता 
मेरी चाहत को दुल्हन तू
बना लेना मगर सुनले 
जो मेरा हो नहीं पाया 
वो तेरा हो नहीं सकता "

भर्मर कोई कुमुदनी पर 
मचल बैठा तो हंगामा 
हमारे दिल में कोई ख्वाब 
पल बैठा तो हंगामा 
अभी तक डूब कर सुनते थे 
सब किस्सा मोहब्बत का 
हम किस्से को हकीक़त में
बदल बैठे तो हंगामा"

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